Abujhmad History:1970 के दशक के अंत में माओवादी संगठनों की दो टीमें बस्तर और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली क्षेत्र में पहुंचीं और घने जंगलों में ऐसे सुरक्षित ठिकाने की तलाश शुरू की, जहां सुरक्षा बलों की पहुंच मुश्किल हो. नक्सली नेतृत्व ने गणपति और अन्य नेताओं को इस क्षेत्र में भेजकर एक रणनीतिक बेस बनाने की योजना बनाई थी, ताकि वहां से अपने प्रभाव को बढ़ाकर एक रेड कॉरिडोर विकसित किया जा सके.
नक्सल प्रभाव से विकास की ओर बढ़ता अबूझमाड़, जहां हरियाली के बीच छुपी है संघर्ष की कहानी