क्या ‘पाताल लोक’ जाता है रामगढ़ की गुफाओं का रास्ता? अंतिम छोर पर आज तक नहीं पहुंच पाया कोई, जानिए आखिर कैसे पड़ा नाम?

छत्‍तीसगढ़ के रामगढ़ की गुफाओं को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है. पूर्व डिप्‍टी सीएम टीएस सिंहदेव ने इनको लेकर चिंता जाहिर की है. उनका कहना है कि केते कोल एक्सटेंशन के मामले में फिर विचार करना चाहिए. टीएस सिंहदेव ने FAC से गुहार लगाते हुए कहा कि अगर 7 लाख पेड़ कटेंगे तो जंगल तबाह हो जाएंगे. ऐसे में रामगढ़ की प्राचीन गुफाओं पर खतरे का दावा किया जा रहा है. दरअसल रामगढ़ की गुफाएं बड़े रहस्‍य से जुड़ी हुई हैं. ऐसे सवाल हैं कि क्या रामगढ़ की गुफाओं का रास्ता सच में ‘पाताल लोक’ तक जाता है? हालांकि सरगुजा की सीताबेंगा और जोगीमारा गुफाओं को लेकर स्थानीय मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान यहां रुके थे, इसलिए इस जगह का नाम रामगढ़ पड़ा. कहा जाता है कि गुफाओं के भीतर ऐसे संकरे और अंधेरे रास्ते हैं, जिनका अंतिम छोर आज तक कोई नहीं खोज पाया. इसी वजह से इन्हें ‘पाताल लोक’ से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि वैज्ञानिक इन दावों की पुष्टि नहीं करते. इतिहासकारों के मुताबिक ये गुफाएं भारत की प्राचीन नाट्यकला, चित्रकला और सांस्कृतिक विरासत की अहम पहचान हैं. गुफाएं छत्तीसगढ़ के सरगुजा क्षेत्र में अंबिकापुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे-130 पर स्थित है. अंबिकापुर से इसकी दूरी करीब 50 किलोमीटर है. पहाड़ी रास्ते से थोड़ी पैदल चढ़ाई के बाद यह ऐतिहासिक गुफाएं पर्यटकों को प्राचीन भारत की कला विरासत से रूबरू कराती है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *